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जिनसे शिवजी होते हैं प्रसन्न वह शिव पूजा के 5 नियम

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        शिवशंकर की पूजा-अर्चना से कई जन्मों का फल प्राप्त होता है। यदि विधिविधान से पूजन किया जाए तो निश्चित ही मनोवांछित फल प्राप्त होता है। आइए जानते हैं कि शिव पूजन में अर्पण किए जाने वाली एक अत्यंत महत्वपूर्ण वस्तु और सिद्ध पूजन विधि के बारे में... बिल्व पत्र शंकर जी को बहुत प्रिय हैं, बिल्व अर्पण करने पर शिवजी अत्यंत प्रसन्न होते हैं और मनमांगा फल प्रदान करते हैं। लेकिन प्राचीन शिव पुराण के अनुसार भगवान शिव पर अर्पित करने हेतु बिल्व पत्र तोड़ने से पहले एक विशेष मंत्र का उच्चारण कर बिल्व वृक्ष को श्रद्धापूर्वक प्रणाम करना चाहिए, उसके बाद ही बिल्व पत्र तोड़ने चाहिए। ऐसा करने से शिवजी बिल्व को सहर्ष स्वीकार करते हैं। क्या है बिल्व पत्र तोड़ने का मंत्र- अमृतोद्धव श्रीवृक्ष महादेवप्रिय: सदा। गृहामि तव पत्रणि शिवपूजार्थमादरात्।। यह समय निषिद्ध है बिल्ब पत्र तोड़ने के लिए... हमेशा ध्यान रखें कि चतुर्थी, अष्टमी, नवमी, चतुर्दशी और अमावस्या तिथियों को, संक्रांति के समय और सोमवार को बिल्व पत्र कभी नहीं तोड़ने चाहिए। यदि पूजन करना ही हो एक दिन पहल...

जानिए भगवान शिव क्यों कहलाते हैं रूद्र

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        रुद्र का शाब्दिक अर्थ होता है – रुत यानि दु:खों को अंत करने वाला। यही कारण है कि शिव को दु:खों को नाश करने वाले देवता के रुप में पूजा जाता है। व्यावहारिक जीवन में कोई दु:खों को तभी भोगताहै, जब तन, मन या कर्म किसी न किसी रूप में अपवित्र होते हैं। शिव के रुद्र रूप की आराधना का महत्व यही है कि इससे व्यक्ति का चित्त पवित्र रहता है और वह ऐसे कर्म और विचारों से दूर होता है, जो मन में बुरे भाव पैदा करे।        शास्त्रों के मुताबिक शिव ग्यारह अलग-अलग रुद्र रूपों में दु:खों का नाश करते हैं। यह ग्यारह रूप एकादश रुद्र के नाम से जाने जाते हैं। जानते हैं ऐसे ही ग्यारह रूद्र रूपों को – 1. शम्भू – शास्त्रों के मुताबिक यह रुद्र रूप साक्षात ब्रह्म है। इस रूप में ही वह जगत की रचना, पालन और संहार करते हैं। 2. पिनाकी – ज्ञान शक्ति रुपी चारों वेदों के के स्वरुप माने जाने वाले पिनाकी रुद्र दु:खों का अंत करते हैं। 3. गिरीश – कैलाशवासी होने से रुद्र का तीसरा रुप गिरीश कहलाता है। इस रुप में रुद्र सुख और आनंद देने वाले माने गए हैं। 4. स्थाणु – सम...

सोमवार के दिन इस तरह करें भोले नाथ को प्रसन्न, मिलेगी भय से मुक्ति

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            अगर सोमवार के दिन भगवान शिव की सच्चे मन से पूजा की जाए तो सारे क्लेशों से मुक्ति मिलती है और मन की सारी मुरादें जरुर पूरी हो जाती हैं। भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए सोमवार को सुबह उठकर स्नान करके भगवान शिव की आराधना करें।             हिन्दू शास्त्रों में सप्ताह का हर एक दिन किसी न किसी देवी-देवता की विशेष पूजा अर्चना के लिए रखा गया है। सप्ताह का पहला दिन यानि सोमवार का दिन भगवान शिव का माना जाता है। भगवान शिव जल्दी से प्रसन्न होने वाले देवता है और इनकी पूजा में किसी विशेष साम्रगी की ज्यादा आवश्यकता नहीं होती है।            भोले नाथ को चंदन, अक्षत, बिल्व पत्र, धतूरा या आंकड़े के फूल,दूध,गंगाजल बेहद ही प्रिय वस्तु होती है। इन्हें चढ़ाने से भगवान शंकर जल्दी प्रसन्न होकर अपनी कृपा बरसाते हैं।            सोमवार के दिन भगवान शिवजी को घी, शक्कर, गेंहू के आटे से बने प्रसाद का भोग लगाना चाहिए। इसके बाद धूप, दीप से आरती करें।       ...

जानिए शिव जी के यह १०८ पवित्र नाम

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जानिए शिव जी के यह १०८ पवित्र नाम  भगवान शिव के 108 नाम 1.शिव – कल्याण स्वरूप 2.महेश्वर – माया के अधीश्वर 3.शम्भू – आनंद स्वरूप वाले 4.पिनाकी – पिनाक धनुष धारण करने वाले 5.शशिशेखर – चंद्रमा धारण करने वाले 6.वामदेव – अत्यंत सुंदर स्वरूप वाले 7.विरूपाक्ष – विचित्र अथवा तीन आंख वाले  8.कपर्दी – जटा धारण करने वाले 9.नीललोहित – नीले और लाल रंग वाले 10.शंकर – सबका कल्याण करने वाले 11.शूलपाणी – हाथ में त्रिशूल धारण करने वाले 12.खटवांगी- खटिया का एक पाया रखने वाले 13.विष्णुवल्लभ – भगवान विष्णु के अति प्रिय 14.शिपिविष्ट – सितुहा में प्रवेश करने वाले 15.अंबिकानाथ- देवी भगवती के पति 16.श्रीकण्ठ – सुंदर कण्ठ वाले 17.भक्तवत्सल – भक्तों को अत्यंत स्नेह करने वाले 18.भव – संसार के रूप में प्रकट होने वाले 19.शर्व – कष्टों को नष्ट करने वाले 20.त्रिलोकेश- तीनों लोकों के स्वामी 21.शितिकण्ठ – सफेद कण्ठ वाले 22.शिवाप्रिय – पार्वती के प्रिय 23.उग्र – अत्यंत उग्र रूप वाले 24.कपाली – कपाल धारण करने वाले 25.कामारी – कामदेव के शत्रु, अंधकार को...