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महाभारत से जुडी रोचक अनसुनी बाते जो आपको हैरान कर देंगी

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             महाभारत की लोकप्रियता का अंदाजा इस  बात से लगाया जा सकता है की आज भी आप हर एक दो साल बात महाभारत के ऊपर बने टीवी सीरियल को अलग अलग चैनल पर देख सकते है. कहानी वही होती है लेकिन दिखाने के  तरीके अलग और फिर भी लोग इसे उतना ही पसंद करते है. हम सभी जानते है की किस प्रकार दुर्योधन की महत्वकांशा और लालच ने भाइयो के बीच आपसी  युद्ध को निमत्रण दिया.  लेकिन इस लेख में हम आपको महाभारत की कहानी नहीं बल्कि महाभारत के कुछ ऐसे रोचक तथ्य बताएँगे जिसके आपके बारे में आपने शायद नहीं सुना होगा.     एकलव्य का पुनर्जन्म था द्रौपदी का भाई धृष्टद्युम्न     क्या आप जानते है द्रोणाचार्य का वध करने वाले द्रौपदी के भाई धृष्टद्युम्न वास्तव में एकलव्य का पुनर्जन्म थे . कहानी के अनुसार जब भगवान कृष्ण ने विवाह हेतु  देवी रुक्मणी का अपहरण किया तब उनका सामना एकलव्य से हुआ. उस समय एकलव्य जरासंध के सेनापति थे. इस युद्ध में श्री कृष्ण के हाथो एकलव्य ने वीरगति प्राप्त की.  उस समय  कृष्ण ने उन्हें आशीर्वा...

जानिए रामायण काल के यह लोग महाभारत काल में भी मौजूद थे

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जानिए रामायण काल के यह लोग महाभारत काल में भी मौजूद थे  भगवान राम और श्रीकृष्ण के बीच लगभ दो हजार वर्ष का फासला है। रामायण का काल महाभारत के काल के पहले का काल है। रामायण काल के कुछ लोग महाभारत काल में भी पाए जाते हैं। सवाल यह उठता है कि यह कैसे संभव हुआ। हालांकि इसके जवाब भी है। आओ जानते हैं कि ऐसा कौन से लोग थे जो रामायण और महाभारत दोनों ही काल में मौजूद थे। जामवन्त : सतयुग में जामवंत : परशुराम और हनुमान से भी लंबी उम्र है जामवन्तजी कि क्योंकि उनका जन्म सतयुग में राजा बलि के काल में हुआ था। परशुराम से बड़े हैं जामवन्त और जामवन्त से बड़े हैं राजा बलि। कहा जाता है कि जामवन्त सतयुग और त्रेतायुग में भी थे और द्वापर में भी उनके होने का वर्णन मिलता है। जामवन्तजी को अग्नि पुत्र कहा गया है। जामवन्त की माता एक गंधर्व कन्या थी। सृष्टि के आदि में प्रथम कल्प के सतयुग में जामवन्तजी उत्पन्न हुए थे। जामवन्त ने अपने सामने ही वामन अवतार को देखा था। त्रेतायुग में जामवंत : त्रेतायुग में भी जामवन्त बूढ़े हो चले थे। राम के काल में उन्होंने भगवान राम की सहायता की थी। कहते हैं...