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होली के सबसे बेहतरीन 10 शुभकामना के संदेश हिंदी में | Top 10 HAPPY HOLI wishes in HINDI

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होली के शुभकामना संदेश हिंदी में   राधा का रंग और कान्हा की पिचकारी प्यार के रंग से रंग दो दुनियाँ सारी यह रंग ना जाने कोई जात ना कोई बोली मुबारक हो आपको रंगों भरी होली होली की हार्दिक शुभकामनाएं ****** सोंचा किसी अपने को याद करे अपने किसी ख़ास को याद करे किया है हमने फैसला होली मुबारक कहने का दिल ने कहा क्यों ना आपसे शुरुआत करे होली की हार्दिक शुभकामनाएं ****** हमेशा मीठी रहे आपकी बोली खुशयो से भर जाए आपकी झोली आप सब को मेरी तरफ से हैप्पी होली होली की हार्दिक शुभकामनाएं ***** गुल ने गुलशन से गुलफान भेजा है सितारों ने आसमान से सलाम भेजा है मुबारक हो आप को होली का त्यौहार हमने दिल से ये पैगाम भेजा है होली की हार्दिक शुभकामनाएं ***** मक्के की रोटी निम्बू का अचार सूरज की किरणें खुशियों की बहार चाँद की चांदनी अपनों का प्यार मुबारक हो आपको होली का त्यौहार होली की हार्दिक शुभकामनाएं ***** निकलो गलियों में बना कर टोली भिगा दो आज हर एक की झोली कोई मुस्कुरा दे तो उसे गले ...

भगवान श्री गणेश जी के ८ अवतार

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         आज हम आपको भगवान गणेश के प्रमुख 8 अवतारों के बारे में बताएंगे। अन्य सभी देवताओं के समान भगवान गणेश ने भी आसुरी शक्तियों के विनाश के लिए विभिन्न अवतार लिए। श्रीगणेश के इन अवतारों का वर्णन गणेश पुराण, मुद्गल पुराण, गणेश अंक आदि ग्रंथो में मिलता है।जानिए श्रीगणेश के अवतारों के बारे में- 1. वक्रतुंड -          वक्रतुंड का अवतार राक्षस मत्सरासुर के दमन के लिए हुआ था। मत्सरासुर शिव भक्त था और उसने शिव की उपासना करके वरदान पा लिया था कि उसे किसी से भय नहीं रहेगा। मत्सरासुर ने देवगुरु शुक्राचार्य की आज्ञा से देवताओं को प्रताडि़त करना शुरू कर दिया। उसके दो पुत्र भी थे सुंदरप्रिय और विषयप्रिय, ये दोनों भी बहुत अत्याचारी थे। सारे देवता शिव की शरण में पहुंच गए। शिव ने उन्हें आश्वासन दिया कि वे गणेश का आह्वान करें, गणपति वक्रतुंड अवतार लेकर आएंगे। देवताओं ने आराधना की और गणपति ने वक्रतुंड अवतार लिया। वक्रतुंड भगवान ने मत्सरासुर के दोनों पुत्रों का संहार किया और मत्सरासुर को भी पराजित कर दिया। वही मत्सरासुर कालांतर में गणपति क...

जानिए घर में कपूर जलाने के फायदे

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         हिन्दू संस्कृति में अपने ईश्वर से प्रार्थना और उनकी आरती करने का चलन वैदिक काल से चला आ रहा है जिसका अपना एक विधान, एक तरीका है। आपने अक्सर देखा होगा कि ईश्वर की पूजा करने के बाद जब आरती की जाती है तो उसमें कपूर का प्रयोग अवश्य किया जाता है। धूप, अगरबत्ती के साथ कपूर को भी जलाया जाता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि ऐसा क्यों? कपूर जलाने के फायदे       जब कपूर को जलाया जाता है तो वह बिना अपना कोई अंश छोड़े पूरी तरह जल जाता है। कपूर के पूरी तरह जलने के बाद वहां भीनी-भीनी खुशबू और ताजगी से भरा वातावरण शेष रह जाता है। इसका अर्थ आप इस संदर्भ में भी ले सकते हैं कि कपूर को जलाने वाला व्यक्ति अपने भीतर की सभी अशुद्धियों और अहंकार को समाप्त कर स्वयं को ईश्वर के चरणों में समर्पित कर देता है।       माना जाता है कि कपूर जलाने से वायुमण्डल शुद्ध होता है। साथ ही हानिकारक संक्रामक बैक्टीरिया नष्ट होती है। माना जाता है कि जिस घर में रोजाना कपूर जलाई जाती है। वहां की नकारात्मक ऊर्जा नष्ट हो जाती है और सकारात्मक उर्जा पैदा ह...

सुबह-सुबह यह मंत्र पढ़ने से मिलती है सफलता

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सफलता पाने के लिए जरूर पढ़े यह सभी मंत्र प्रात:कालीन प्रभावशाली मंत्र       अगर आप चाहते हैं हर दिन आपका शुभ और सफलतादायक हो तो बिस्तर से उठते ही अपने दोनों हाथों को आपस में रगड़ कर चेहरे पर लगाए और दिए गए मंत्रों में से किसी भी 1 मंत्र को बोलें।        आपका दिन उन्नतिदायक और प्रसन्नतापूर्वक व्यतीत होगा। 1 . ॐ मंगलम् भगवान विष्णु: मंगलम् गरूड़ध्वज:। मंगलम् पुण्डरीकांक्ष: मंगलाय तनो हरि।। 2 . कराग्रे वसते लक्ष्मी: कर मध्ये सरस्वती। करमूले गोविन्दाय, प्रभाते कर दर्शनम्। 3 . गुरुर्ब्रह्मा, गुरुर्विष्णु, गुरुर्देवो महेश्वर:। गुरु साक्षात् परब्रह्मा तस्मै श्री गुरुवे नम: 4 . करारविन्देन पदारविन्दं, मुखारविन्दे विनिवेशयन्तम्। वटय पत्रस्य पुटेशयानं, बालं मुकुन्दं मनसा स्मरामि।। 5. सी‍ताराम चरण कमलेभ्योनम: राधा-कृष्ण-चरण कमलेभ्योनम:। 6 . राम रामेति रामेति रमे रामे मनोरमै: सहस्त्रनाम तत्तुल्यं श्री रामनाम वरानने।   7 . माता रामो मम् पिता रामचन्द्र:  स्वामी रामो ममत्सखा सखा रामचन्द्र:...

जिनसे शिवजी होते हैं प्रसन्न वह शिव पूजा के 5 नियम

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        शिवशंकर की पूजा-अर्चना से कई जन्मों का फल प्राप्त होता है। यदि विधिविधान से पूजन किया जाए तो निश्चित ही मनोवांछित फल प्राप्त होता है। आइए जानते हैं कि शिव पूजन में अर्पण किए जाने वाली एक अत्यंत महत्वपूर्ण वस्तु और सिद्ध पूजन विधि के बारे में... बिल्व पत्र शंकर जी को बहुत प्रिय हैं, बिल्व अर्पण करने पर शिवजी अत्यंत प्रसन्न होते हैं और मनमांगा फल प्रदान करते हैं। लेकिन प्राचीन शिव पुराण के अनुसार भगवान शिव पर अर्पित करने हेतु बिल्व पत्र तोड़ने से पहले एक विशेष मंत्र का उच्चारण कर बिल्व वृक्ष को श्रद्धापूर्वक प्रणाम करना चाहिए, उसके बाद ही बिल्व पत्र तोड़ने चाहिए। ऐसा करने से शिवजी बिल्व को सहर्ष स्वीकार करते हैं। क्या है बिल्व पत्र तोड़ने का मंत्र- अमृतोद्धव श्रीवृक्ष महादेवप्रिय: सदा। गृहामि तव पत्रणि शिवपूजार्थमादरात्।। यह समय निषिद्ध है बिल्ब पत्र तोड़ने के लिए... हमेशा ध्यान रखें कि चतुर्थी, अष्टमी, नवमी, चतुर्दशी और अमावस्या तिथियों को, संक्रांति के समय और सोमवार को बिल्व पत्र कभी नहीं तोड़ने चाहिए। यदि पूजन करना ही हो एक दिन पहल...

एक अद्भुत चमत्कार, शिवलिंग पर अपने-आप ही होता है जलाभिषेक

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       देवभूमि भारत ऋषि-मुनियों की तपोभूमि और चमत्कारिक भूमि है। जब धरती पर देवी-देवता रहते थे, तो उस काल में उनके निर्देशन में धरती पर ऐसे स्थानों की खोज की गई जो धरती के किसी न किसी रहस्य से जुड़े थे या जिनका संबंध दूर स्थित तारों से था। इसी के चलते भारत में हजारों चमत्कारिक मंदिर और स्थान निर्मित हो गए जिनको देखकर आश्चर्य होता है। हर मंदिर से जुड़ी एक कहानी है जिसपर लोग आस्था रखते हैं। ऐसा ही एक शिव मंदिर है जहां शिवलिंग में अपने आप ही होता है जलाभिषेक।        झारखंड को राम के काल में दंडकारण्य का क्षेत्र कहा जाता था। यह उस काल में ऋषियों की तपोभूमि था। घने जंगलों से घिरे इस क्षे‍त्र में कई ऋषियों के आश्रम थे जहां देवता उनसे मिलने आते थे। इसी झरखंड के रामगढ़ जिले में एक चमत्कारिक शिवमंदिर है, जिसके बारें में कहा जाता है कि इसके चमत्कार को देखकर अंग्रेज काल में अंग्रेजों की आंखें फटी की फटी रह गई थी। इस मंदिर की कहानी और प्रसिद्धि दूर-दूर तक फैली है।         रामगढ़ में स्थित इस शिवमंदिर को प्राचीन मंदिर टूटी झरना के...

जानिए संचित कर्म क्या होते हैं?

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            धर्मशास्त्र और नीतिशास्त्रों में कहा गया है कि कर्म के बगैर गति नहीं। सनातन धर्म भाग्यवादियों का धर्म नहीं है। वेद, उपनिषद और गीता- तीनों ही कर्म को कर्तव्य मानते हुए इसके महत्व को बताते हैं। यही पुरुषार्थ है।श्रेष्ठ और निरंतर कर्म किए जाने या सही दिशा में सक्रिय बने रहने से ही पुरुषार्थ फलित होता है। इसीलिए कहते हैं कि काल करे सो आज कर। वेदों में कहा गया है कि समय तुमको बदले इससे पूर्व तुम ही स्वयं को बदल लो- यही कर्म का मूल सिद्धांत है। अन्यथा फिर तुम्हें प्रकृति या दूसरों के अनुसार ही जीवन जीना होगा।  #        धर्म शास्त्रों में मुख्‍यत: छह तरह के कर्म का उल्लेख मिलता है- 1.नित्य कर्म (दैनिक कार्य), 2.नैमित्य कर्म (नियमशील कार्य), 3.काम्य कर्म (किसी मकसद से किया हुआ कार्य), 4.निश्काम्य कर्म (बिना किसी स्वार्थ के किया हुआ कार्य), 5.संचित कर्म (प्रारब्ध से सहेजे हुए कर्म) और 6.निषिद्ध कर्म (नहीं करने योग्य कर्म)। # क्या है संचित कर्म? हिंदू दर्शन के अनुसार, मृत्यु के बाद मात्र यह भौतिक शरीर या देह...